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Wanted: Bahu for my driver beta

by Ramesh

Posted on Mar 22, 2016 at 11:30 AM

Good morning from Delhi.

Meet Raju from Sultanpur, Uttar Pradesh. He is a long haul truck driver, crossed 30 and unmarried. Not that he is averse to tying a mangalsutra and settling down and adding to India's 1.2 billion population. But ...

No sensible dad would like to give his ladli beti to a truck driver. Why? Because these driverbhais are away from home for long stretches. Get into bed with commercial sex workers at roadside dhabas or inside trucks to satisfy their physical hunger.

Show me a girl and prospective father in law, and am ready, he said with a tinge of sorrow. Being a truck driver, who feeds us, clothes us etc. is a social stigma.

Well, Raju is one of those million drivers who are unmarried out of compulsion.

wanted bahu

I recall another incident in Jhunjhunu, Rajasthan - a huge pocket of driver population. A mother of a driver - known to me over years - pleads with me to get her son a 'achchi naukri' even as a chaprasi in some office so that she can bring a bahu home.

You know what is the compensation she offered me for this service?

"Sirji, mein aap ke saath bhaag ne ki liye tayaar hoon! (Am ready to run away with you)"

This is no humour. Painful reminder of our attitude towards our less privileged brethren.

Writing in Young India, Mahatma Gandhi in 1931, he said: "Every man has an equal right to the necessities of life even as bees and beasts have"

Like air, water, food etc, I honestly believe SEX - and raising a family of one's own - is equally a necessity of life. Agree or not?.

Hindi Version by Raghuram

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा गांव है l इस गांव के अधिकांश नौजवान गांव के होते हुए भी गांव में कम और बाहर ज्यादा समय बिताते हैं l कभी उत्तर से दक्षिण तो कभी पूरब से पश्चिम l भिखारी और शिकारी के आने- जाने की कोई समय सीमा निश्चित नहीं रहती हैैै इस गांव के नौजवान न तो शिकारी हैं और न ही किसी भी तुलना में भिखारी l यह सब ड्राइवर हैं , हाइवे के ड्राइवर l पहली दो श्रेणियों के बाद आप इनका भी नाम जोड़ सकते हैं l राजू इसी गांव का एक नौजवान है l उम्र होगी यही 30 वर्ष के आसपास l अभी उसकी शादी नहीं हुई है l शादी का ना होना उसकी खुद की इच्छा या अनिच्छा नहीं है l राजू एक हाईवे चालक है l भला ड्राइवर को कौन अपनी बेटी दे l देश की आबादी को आगे बढ़ाने में इनका योगदान नहीं है l राजू तो तैयार बैठा है हाथ में मंगलसूत्र पकड़े l बड़ी मायूसी से कहता है राजू कि कोई भलमानस मुझे मेरे भावी ससुर और सपनों में सजा रखी दुल्हन को दिखा तो दे l अब भला कोई भी समझदार बाप अपनी बेटी के हाथ इस राजू के हवाले क्यों करे जिसे कई दिनों , नहीं कभी-कभी कई सप्ताह भी बीत जाते हैं घर से बाहर l पेट की भूख मिटाने के लिए ढाबा और शरीर की भूख मिटाने के लिए ढाबे का पिछवाडा l कैसी विडंबना है एक व्यक्ति जो प्रत्यक्ष व परोक्ष रुप से हमारे खाने-पीने से लेकर पहनने ओढ़ने के सारे प्रबंध एक प्रकार से करता है खुद उसकी अपनी ही जिंदगी में ड्राइवर का होना एक कलंक सा है l राजू उन लाखों ड्राइवरों में से एक है जिसकी शादी इसी सामाजिक विवशता के कारण रुकी पड़ी है l

इस मुद्दे की चर्चा करते हुए मुझे अकस्मात याद आ रही है उस घटना की जो यहां से सैकड़ों मील दूर राजस्थान के झुंझुनू गांव में हुई थी l इस गांव के आसपास तो हाईवे ड्राइवरों का एक कुनबा ही बसा हुआ है l एक दिन जब मैं इस गांव में कई दिनों से परिचित एक ड्राईवर के घर गया तो उसकी अम्मा ने मुझसे कहा ,'साहब , आप मेरे इस बेटे को कहीं नौकरी पर लगवा दो l बहुत हो चुकी ड्राइवरी और कुछ नहीं तो किसी दफ्तर में चपरासी का ही काम दिलवा दो बाबूजी l इसे नौकरी मिलेे तो मुझे एक अच्छी बहू तो मिल जाएगी l यह एक भला कर दो सरजी , इसके एवज में , मैं आपके साथ भागने के लिए तैयार हूँ l"

बात हँसने की नहीं बल्कि काफी दुख दायक है समाज के इस विशाद से पीडित ड्राइवर भाइयों की गाथा l

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एकबार सन् 1931 में 'यंग इंडिया ' पत्रिका में कुछ इस तरह की बात लिखी थी कि हरएक व्यक्ति समान अधिकारों का हकदार है भला वह मक्खी हो या मगरमच्छ l भले ही कोई स्वीकार करे या ना करे ,मेरी अपनी धारणा है कि, वायु , जल और भोजन आदि की तरह हर एक व्यक्ति के लिए यौन संबंध और अपने खुद का परिवार बनाना और बसाना शारीरिक और मानसिक रूप से उतना ही आवश्यक होता है l


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