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Truckers demand condom!

by Ramesh

Posted on Mar 27, 2016 at 11:30 AM

Relax. Before you jump to conclusions that this community - labelled as 'bridge population' because of their job nature - is opting for safe sex and thus escape from HIV/AIDS, understand the fact that their demand for condoms has nothing to do with sex.

Then what?

Interestingly, long haul drivers find the sheath of rubber that was supposed to prevent life-generating human fluid from reaching their targets - wombs of their female sexual partners - is more useful as an emergency or stop gap stopper of leaking pipes of their vehicle. "They are the best remedy," concurs Monu Yadav from Agra. Vibhuti Misra from Allahabad claims that he always asks for extra pockets of condom/rubber to kept as stock in his driver cabin whenever enthusiastic NACO volunteers distribute on highway dhabas.

Sarcastically he says that higher distribution or consumption of 'rubber' at highways dhabas, transport nagars etc. should not be construed as India's fight against the much dreaded HIV/AIDS menace is proceeding smoothly. Point to be noted.

They need rubber, but for different type of leak stoppage. Jugaad, if you like. Operational efficiency and alternate thinking.

Trucker Demand Condom

(KRK Foundation Coordinator Khem Singh distributing condoms at LG India plant, Greater Noida. Photo: Kausar Hussain)

There are media reports of late that turns the spotlight on this life-snatching killer disease. Harry Stevens writing in Navhind Times quotes Samir Banik who asserts that HIV Positive cases are on the rise. Who is she? She is the general secretary of the Tripura State Network of Positive People, a support and advocacy group for people with HIV/AIDS. “Between 2007 and 2015, India’s HIV prevalence — that is, the proportion of India’s adult population that is HIV-positive — fell by an estimated 24 percent. HIV prevalence in Tripura, however, more than doubled during that time. Likewise, while new HIV infections and AIDS-related deaths plummeted across the country, they spiked in Tripura,” says the report.

Tripura is bucking the national trend, and it’s not alone. The report also points to discouraging trends in Assam, Sikkim and, to a lesser extent, in Arunachal Pradesh, Delhi, Gujarat, Haryana, Jharkhand, Punjab, Rajasthan, and Uttarakhand. The same report, however cautions against exaggeration. “It is important to keep in consideration that these are estimates,” said Savina Ammassari, senior adviser for the Joint United Nations Programme on HIV and AIDS (UNAIDS) in India. “So you have confidence intervals. It’s not exact science. That’s absolutely a must to understand.”

Besides Tripura, another north eastern state viz., Assam also experiencing a spike. Reports have it that an increasing number of people — truck drivers, pregnant mothers, drug addicts, teenagers, sex workers — show up at clinics and test positive for the virus.

HIV hotbeds are Maharashtra, Andhra Pradesh, Telangana, and Karnataka- combining for nearly half of India’s more than 21 lakh HIV cases. The data on government-run antiretroviral therapy centres amplifies this input: In 2014, Assam had four, AP 51, Karnataka 55, Maharashtra 82 and Tamil Nadu 51. By the way, barring Assam these are key states in mainland that handles major chunk of freight across Indian highways, forming a part of Golden Quadrilateral.

NACO’s reach out program to tap the target group of truck drivers is not effective due to poor implementation and monitoring. Neither the government seems to be serious nor the trade bodies. Add the budget cut to NACO and the challenge becomes tougher. India is past the awareness stage as far as truck drivers is concerned. Effective monitoring is the way forward.

One of the most viable route is to make it MANDATORY for every single HCV driver going for fresh driving license or renewal to submit himself for a HIV/AIDS check up. Considering the fact that thousands of them approach RTOs daily in this regard, this will be very effective. Secondly, the Indian industry, going whole hog with outsourcing and contracted out transportation, has to ensure every single driver deployed by their contractors submit authentic Driver Health Report with specific reference to HIV/AIDS. Again, every single truck challaned for whatever crime has to make it compulsory for the driver concerned to undergo HIV/AIDS check up.

What we are talking about is the health of nation because truck drivers are carriers of HIV/AIDS as well. A bit of pain has to be endured in overall good.

Hindi Version by Raghuram

अगर मैं आप से कहूं कि हाल फिलहाल में भारत के हाईवे चालकों के बीच निरोध की मांग बढ़ गई है तो आप तुरंत इसी नतीजे पर पहुंचेंगे की भारत की यह चल जनसंख्या बहुत जागरूक हो चली है l वे एचआईवी / एड्स से बचने के लिए ऐसा कर रहे हैं तो महाशय यह आपकी गलतफहमी होगी l वास्तविकता तो यह है कि निरोध की मांग और योन संबंध के बीच कोई रिश्ता नहीं है l

आप पूछेंगे भला वह कैसे ? बड़ी मजेदार बात बताऊं हाईवे के हमारे ये चालक इस रबर के खोल से ट्रक की पाइप में से होने वाले लीक को रोकते हैं वनिस्पत इसके कि सेक्स कर्मियों के साथ समय बिताते समय अपनी लीक रोक सकें l

आगरे का मोनू यादव इसकी पुष्टि में कहता है , " ट्रक में इंधन के लीक को रोकने का यह सर्वश्रेष्ठ उपाय है "l

इलाहाबाद के विभूति मिश्रा महाशय फरमाते हैं कि वह अक्सर कुछ अतिरिक्त निरोध के पैकेट ले लेते हैं ताकि ड्राइवर के कैबिन में इसकी कमी न हो l NACO के उत्साही कार्यकर्ता इसे अपनी सफलता का मापदंड समझें तो वह अलग बात है l

व्यंग भरे स्वर में मिश्रा जी कहते हैं कि वास्तविकता कुछ अलग ही है l हाईवे के ढाबे , ट्रांसपोर्ट नगर आदि में निरोध का अधिक वितरण होना इस बात का कतई संकेत नहीं है कि भारत में चालक एच आई वी / एड्स के प्रति अधिक जागरुक हो चले हैं और भारत की लड़ाई इस खूंखार रोग से सफलतापूर्वक चल रही है l

बात विचार करने लायक है l अगर 'जुगाड़ 'के लिए कोई नोबेल प्राइज दिया जाए तो वह निश्चय ही हमारे हाईवे चालकों को ही मिलेगा l भला इससे बड़ा जुगाड़ और क्या हो सकता है कि सुरक्षा का साधन निरोध का रबर ड्राइवर साथियों के परिचालन क्षमता और वैकल्पिक सोच को दर्शाता है l

हाल के मीडिया रिपोर्टों ने इस जानलेवा घातक बीमारी की ओर ध्यान आकर्षित किया है l नवभारत टाइम्स में लिखते हुए हैरी स्टीवेंन्स ने समीर बानिक की बात को दोहराया कि है HIV सकारात्मक मामले अधिक हो रहे हैं l आप Tripura State Network of Positive People जो कि एच आई वी / एड्स से पीड़ित लोगों का समर्थन और सिफारिश करता है , की महासचिव हैं l उनके रिपोर्ट के अनुसार " सन् 2007 से 2015 के बीच भारत में एच आई वी का प्रसार देश की वयस्क जनसंख्या जोकि एच आई वी सकारात्मक से पीड़ित हैं के अनुपात में 24% कम हुई है l लेकिन त्रिपुरा में एच आई वी का फैलाव उसी समय सीमा में दुगने से अधिक हुआ है l इसी तरह जहां कि नए HIV संक्रमण और एड्स संबंधित मृत्यु देश के अन्य हिस्सों में घटी है वहीं त्रिपुरा में इस संख्या में वृद्धि हुई है " l

त्रिपुरा का रुझान राष्ट्रीय प्रवृति के विपरीत है और इसमें त्रिपुरा अकेला नहीं है l रिपोर्ट के अनुसार ऐसी निराशाजनक प्रवृत्ति आसाम , सिक्किम और कुछ कम हद तक अरुणाचल प्रदेश ,दिल्ली ,गुजरात , हरियाणा , झारखंड ,पंजाब , राजस्थान और उत्तराखंड मैं भी है l साथ ही साथ रिपोर्ट यह भी कहता है कि इस संदर्भ की अत्युक्ति न की जाए l " "इस बात को ध्यान में रखा जाए कि ये सिर्फ अनुमान हैं " कहते हुए संयुक्त राष्ट्र के एच आई वी और एड्स(UNAIDS), भारत के वरिष्ठ सलाहकार , सवीना अम्मासारी ,आगे कहते हैं कि, " इसका अर्थ है कि ऐसी परिस्थितियां आत्मविश्वास का अंतराल मात्र हैं l यह सटीक विज्ञान नहीं है l इस बात को समझने की अत्यंत आवश्यकता है" l त्रिपुरा के अलावा दूसरे उत्तर पूर्वी राज्य और असम में भी इसकी वृद्धि के लक्षण दिख रहे हैं l बढ़ती संख्या में लोग , जिनमें मुख्यतः ट्रक ड्राइवर , गर्भणी माताएं , ड्रग एडिक्ट , किशोर अवस्था और यौन कर्मी जो चिकित्सालय आते हैं अधिकांश एच आई वी पॉजिटिव दिखते हैं l

एच आई वी का संकेंद्रण महाराष्ट्र ,आंध्र प्रदेश , तेलंगाना और कर्नाटका में है जोकि देश के लगभग 50% अर्थात 21 लाख से भी अधिक एच आई वी मामलों में से है l

सरकार द्वारा चलाई जा रही एंटी रेट्रो वायरल थेरेपी सेंटर इस बात की व्याख्या विस्तार रुप से करते हैं-

सन् 2014 में असम 4 , AP 51 ,कर्नाटक 55 महाराष्ट्र 82 और तमिलनाडु 51 l वैसे असम को छोड़कर अन्य राज्य जो गोल्डन क्वाड्रीलेटरल के भाग हैं , माल भाड़ा का अधिकांश अंश भारतीय हाईवे पर ढोते हैं l

NACO का कार्यक्रम अपने लक्ष्य दल ट्रक चालक पर असरदार नहीं रहा जिसका मुख्य कारण कार्यक्रम के कार्यान्वित करने और निगरानी करने की अक्षमता थी l इस विषय में न तो सरकार गंभीर थी और ना ही व्यापार निकाय l NACO के बजट में कटौती ने चुनौतियों को और मुश्किल कर दिया l भारत ट्रक ड्राइवरों के मामले में जागरूकता की अवस्था से आगे निकल चुका है l अब आगे बढ़ने का एक ही रास्ता है- असरदार निगरानी l

एक बहुत ही व्यवहारिक मार्ग है

हर एक HCV चालक के लिए यह अनिवार्य कर दिया जाए की नया लाइसेंस अथवा लाइसेंस का नवीकरण कराने के लिए उसे एच आई वी / एड्स जांच करवाना होगा l

इसके अलावा भारतीय उद्योग को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर एक ड्राइवर जो उनके या उनके कॉन्ट्रैक्टर के अधीन कार्य करता हो उसे स्वास्थ्य रपट जिसमें खासकर एच आई वी / एडस् के प्रति भी लिखा हो जमा करना होगा l

इन उपायों के साथ साथ हर एक ट्रक चालक जिसे किसी भी कारण से चालान किया गया हो उसके लिए एच आई वी / एड्स की जांच अनिवार्य कर दी जानी चाहिए l

देश का स्वास्थ्य ट्रक चालक के स्वास्थ्य से अत्यंत जुड़ा हुआ है क्योंकि ट्रक चालक एच आई वी /एड्स का वाहक है l

जहां दर्द है वहीं आस है l


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